भारतीय क्रिकेटर कैसे बने स्कूल कॉलेज जॉब करते हुए 

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भारतीय क्रिकेटर बनने के लिए सबसे पहले क्रिकेट ट्रायल देने जरूरी होते हैं क्रिकेट ट्रायल देने के लिए उन ट्रायल्स की डेट का सही समय पर पता चलना जरूरी है। ट्रायल की डेट पता चलने पर उनमें कैसे पार्टिसिपेट करें, ट्रायल देने के लिए कहां जाना पड़ता है इन ट्रायल्स में क्या होता है। पार्टिसिपेट करने की शुरुआती उम्र क्या होती है तथा किस उम्र तक पार्टिसिपेट कर सकते हैं। कौन से डॉक्यूमेंट अनिवार्य होते हैं इन सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब आपको आज के इस लेख में मिलने वाले हैं अतः इस लेख को ध्यान से पढ़ें और कोई सवाल हो तो  लेख के अंत में दिए गए कमेंट बॉक्स में जरूर पूछें।

भारतीय क्रिकेटर कैसे बने स्कूल कॉलेज जॉब के साथ कौन से ट्रायल कब कहां दे नीचे विस्तार में समझाया गया है।  

भारतीय क्रिकेटर कैसे बने स्कूल कॉलेज जॉब करते हुए

यदि आपका पैशन क्रिकेट खेलना है तो आपको खुद को एक मौका तो जरूर देना चाहिए। भारतीय क्रिकेट मैच खेलने के लिए प्रतिदिन हर युवा एक सपना देखता है साथ ही क्रिकेट में कंपटीशन बढ़ते जा रहा है इसलिए जब भी आप खुद को आजमाना चाहे तो कमर कस लें लेकिन सिर्फ कॉन्पिटिशन देखकर घबराने की बजाए केलकुलेटर उठाएं और कैलकुलेशन करना शुरू करें। 

अक्सर लोग नौकरी करने पर मजबूर हो जाते हैं और करें भी क्यों नहीं आखिरकार जिंदगी ऐसे ही नहीं गुजरती है उसके लिए पैसा चाहिए होता है घर चाहिए होता है और एक सोर्स ऑफ इनकम चाहिए होता है जो ज्यादातर लोगों को जॉब से मिलती है। लेकिन कैलकुलेशन की बात यह है कि जॉब तो जिंदगी भर करनी है और ट्रायल एक दो या तीन बार देने होते हैं और इतने लोगों में ही आपको पता चल जाता है कि आप क्रिकेट के लिए बने हैं या नहीं। दो-तीन तो दूर की बात है बहुत सारे युवा तो एक भी ट्रायल ही नहीं दे पाते हैं इसकी ज्यादातर 2 वजह  होती है पहला समय रहते उन्हें ट्रायल का पता नहीं चल पाता है और जब वह स्कूल से बाहर निकलते हैं कॉलेज कब खत्म होता है पता नहीं चलता उसके बाद तो जॉब की भागदौड़ शुरू हो जाती है।

दूसरी वजह  पहली वजह से जुड़ी हुई है और वह है जॉब जी हां यह एक सत्य वचन है अधिकांश युवा जॉब में उलझे रहते हैं किंतु उनका मन नहीं मानता और वे अक्सर क्रिकेट के बारे में सोचते हैं और खेलना चाहते हैं ऐसे जोशीले नौजवानों को उम्र की सीमा भी नहीं रोक पाती। पर करें क्या उन्हें यह नहीं पता होता है कि जॉब के साथ-साथ ट्रायल कहां दें और जॉब छोड़ नहीं सकते क्योंकि कुछ नौजवानों के घरवाले ऐसा करने नहीं देंगे और कुछ लोगों के घर उन पर ही निर्भर होते हैं। 

यह नौजवान अक्सर ऐसा प्लेटफार्म तलाशने की कोशिश करते हैं जिसमें जॉब के साथ ट्रायल देने का एक मौका मिल जाए। ओपन ऐज कैटेगरी एक ऐसी कैटेगरी है जो बीसीसीआई ने ऐसे ही युवाओं के लिए बनाई है जो क्रिकेट में थोड़ा देर से आते हैं या फिर किसी मजबूरी जैसे जॉब के कारण सही समय पर क्रिकेट नहीं खेल पाते हैं किंतु बाद में वापसी करना चाहते हैं। इस कैटेगरी के बारे में नीचे विस्तार में बताया गया है।

ट्रायल देने की उम्र

ओपन ऐज कैटेगरी – जो नौजवान जॉब के साथ अपने  पैशन को एक मौका देना चाहते हैं उनके लिए  बीसीसीआई द्वारा ओपन ऐज कैटेगरी बनाई गई है। इसमें ऐसे सभी लोग पार्टिसिपेट कर सकते हैं जिनकी उम्र 23 साल के ऊपर हो चुकी है फिर भले ही वे 40 के हो चुके हो 45 के हो चुके हो या 50 दिन हो चुके हो अगर उनके शरीर में दम है उनकी फिटनेस लेवल सही है सभी लोग ट्रायल दे सकते हैं। 

ट्रायल देने की न्यूनतम उम्र –  यदि आप स्कूल में पढ़ रहे हैं तो आपको ट्रायल देना शुरू कर देना चाहिए स्कूल खत्म होने का इंतजार ना करें क्योंकि स्कूल खत्म होते-होते आपकी उम्र 18 वर्ष हो जाएगी और आप अंडर फोर्टीन के सभी ट्रायल मिस कर जाएंगे। इसलिए जरूरी है कि अंडर 14 ट्रायल देना शुरू कर दें 12 साल के हैं तो कमर कस लें और अंडर 14 की तैयारी करना शुरू कर दें। अंडर फोर्टीन ट्रायल्स बच्चों की श्रेणी में सबसे महत्वपूर्ण होते हैं उसके बाद अंडर 16  तथा अंडर-19 का नंबर आता है। भारत के लिए क्रिकेट खेलना है तो  आपको तेजी दिखानी होगी और अंडर फोर्टीन में नाम कमाना  होगा। 

क्रिकेट ट्रायल डाक्यूमेंट्स 

क्रिकेट ट्रायल देने के लिए आपको नीचे दिए गए सभी डाक्यूमेंट्स उपलब्ध कराने जरूरी है:

स्कूल में पढ़ रहे छात्रों के डाक्यूमेंट्स – आधार कार्ड, स्कूल बोनाफाइड सर्टिफिकेट, पेरेंट्स मैरिज सर्टिफिकेट, मार्क शीट ऑफ लेटेस्ट क्लास, रेंट पर रहते हैं तो रेंट एग्रीमेंट है।

जॉब कर रहे युवाओं के डाक्यूमेंट्स –  सैलरी स्लिप 1 साल की, आधार कार्ड, पैन कार्ड,  रेजिडेंशियल प्रूफ, रेंट पर रह रहे हैं तो रेंट एग्रीमेंट। 

क्रिकेट ट्रायल्स कब और कहां होते हैं 

भारत में 28-29 राज्य हैं और हर राज्य में क्रिकेट ट्रायल प्रतिवर्ष होते हैं। यह ट्रायल जिला स्तर पर होते हैं यदि एक राज्य में 8 जिले हैं तो हर जिले में अलग ट्रायल होते हैं यानी कि 8 जिलों में 8 अलग ट्रायल होंगे। इसके बाद जिला स्तर पर टीमें बनती है तथा ट्रायल में सफल हो जाने के बाद आप इन टीमों का हिस्सा बनते हैं। यह ट्रायल्स राज्यों के हिसाब से अलग-अलग समय पर हो सकते हैं किंतु इनके समय में भी ज्यादा फर्क नहीं होता। अधिकांश ट्रायल सितंबर में पूरे हो जाते हैं किंतु कुछ राज्यों में थोड़ा आगे पीछे भी हो सकते हैं अतः यह जरूरी है कि आप अपने जिले के ट्रायल्स पर निगाह बनाए रखें। अब आप सोच रहे होंगे यह कैसे करें तो चिंता ना करें आपको करना सिर्फ इतना है कि अपने शहर के दैनिक जागरण अमर उजाला अखबार को निरंतर पढ़ना है और खास तौर पर अगस्त के बाद तो आप ही अखबार घर पर ही लगा लें क्योंकि यह अखबार क्रिकेट ट्रायल्स की डेट छपते हैं। जो लोग क्रिकेट क्लब में होते हैं उन्हें तो उनके क्लब के कोच ट्रायल्स की डेट बता ही देते हैं किंतु जो लोग क्रिकेट क्लब में नहीं होते हैं उन्हें अखबार पढ़ना जरूरी है।

हमारे साथ जुड़ने का मौका   

टेलीग्राम ग्रुप प्रीमियम मेंबरशिप – एक समय ऐसा था जब मैं भी क्रिकेट खेला करता था और क्रिकेटर बनना चाहता था किंतु मुझे वही सारे सवाल समझ नहीं आते थे और परेशान करते थे जो आज आपको करते हैं। आप हमारी इस वेबसाइट के कमेंट बॉक्स को अगर देखेंगे तो हर एक पोस्ट पर कई सारे कमेंट है और हर कमेंट में कुछ सवाल पूछे गए हैं। 

बहुत सारे कॉमेंट्स तो हमारे अप्रूवल से बाहर हो चुके हैं किंतु कुछ युवा ऐसे दिखे जो वाकई में क्रिकेटर बनना चाहते हैं। वैसे तो आपको हमारी साइट पर सारी जानकारी आसानी से उपलब्ध हो जाती है लेकिन एक नई शुरुआत के तौर पर मैं टेलीग्राम प्रीमियम चैनल शुरू करने जा रहा हूं और उम्मीद है आप लोग इस चैनल से भी जुड़ेंगे। 

इस चैनल के माध्यम से आपको समय-समय पर क्रिकेट की महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती रहेंगी तथा आप लाइव सेशन द्वारा अपने सवाल डायरेक्टली हमसे पूछ सकते हैं।  

2022 बीत चुका हमारा लक्ष्य 2023 है और मैं अपनी पूरी कोशिश करूंगा कि आप लोगों को 2023 में  होने वाले क्रिकेट टूर्नामेंट की सही जानकारी दे सकूं। 

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