मेरा प्रिय खेल फुटबॉल पर निबंध 6 टू 12 क्लास 1000 शब्द

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मुझे अच्छी तरह से याद है मैं जब 4 क्लास से 7 क्लास तक का सफर तय कर रहा था उस समय मैं सबसे ज्यादा समय अपने प्रिय खेल फुटबॉल को दिया करता था। मेरे डैडी मेरे आइडियल हैं और वे आर्मी से हैं, मेरे डैड आर्मी में स्पोर्ट्स में रहे हैं इसलिए मेरे अंदर भी स्पोर्ट्स के सेल खुद-ब-खुद आ चुके थे। 

मेरा प्रिय खेल पर निबंध 10 लाइंस

मेरे डैड के आर्मी में होने की वजह से हमारी पोस्टिंग 3 से 4 वर्ष के लिए अलग-अलग राज्यों में हुआ करती थी और जब मैं फोर्थ क्लास में गया तो हमारी पोस्टिंग नासिक में हुई थी। उन दिनों मैं नासिक रोड केंद्रीय विद्यालय में पढ़ा करता था और ना सिर्फ मेरा बल्कि हमारी क्लास में पढ़ रहे हैं 18 से 22 लड़कों का प्रिय खेल केवल और केवल फुटबॉल ही हुआ करता था। 

उन दिनों रबड़ की बॉल हुआ करती थी जिसकी जगह आगे चलकर टेनिस बॉल ने ले ली। किंतु हमें गेंद से क्या फर्क पड़ता हमें तो सिर्फ खेलने से मतलब था। 

फुटबॉल की दीवानगी दिमाग में कुछ इस तरह से हावी थी कि मैंने अपनी क्लास के कुछ बच्चों के साथ मिलकर एक पेड़ में से गोंद जैसा कुछ निकालकर उसकी बॉल बनाई थी हालांकि वह टप्पा नहीं खा रही थी। 

कई बार ऐसा होता है कि कुछ चीजें हमें पसंद नहीं होती किंतु उन चीजों से जुड़े लोग हमें पसंद होते हैं और मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। मैथमेटिक्स मेरा सबसे खराब सब्जेक्ट था, जो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं था किंतु हमारे मैथ के टीचर मुझे काफी पसंद थे। इसकी वजह यह थी कि पहले दो पीरियड लगातार उनके होते थे और उन दोनों में से एक पीरियड वे हमें ग्राउंड में खेलने के लिए भेज देते थे। खुशी का ठिकाना उस समय नहीं होता था जब असेंबली खत्म होती थी और हमारा क्लास मॉनिटर मैथ के सर से प्रेयर खत्म होते ही परमिशन लेकर हमारी ओर हाथ से इशारा करते आता कि आज फिर मैदान जाना है। और हम सीधे लाइन बनाकर ग्राउंड की दिशा में खेलने चले जाते थे।

हम में से एक लड़का अक्सर गेंद अपनी जेब में लेकर इस उम्मीद से प्रेयर करने आता था कि आज भी हमें  पहले ही पीरियड में प्रेयर के बाद सीधे मैदान में फुटबॉल खेलने का मौका मिलेगा। मैदान में आते ही हमारी क्लास की लड़कियां या तो किसी पेड़ के नीचे बैठ जाती थी या फिर एक दूसरे का हाथ पकड़ के मैदान के चक्कर काटने  लगती थी, उनमें से कुछ लड़कियां खो-खो खेलने लगती थी। 

किंतु फुटबॉल के प्रति हमारी दीवानगी ऐसी थी कि हम 18 में से 17 लड़के फुटबॉल खेलने के लिए मैदान के बीच खड़े रहते थे। हम जल्दी से टीम बांटते और छोटी सी उस रबड़ की गेंद को हवा में उछाल देते जैसे ही तीसरा टप्पा खाता हमारा खेल शुरू हो जाता। 

अक्सर क्लास में एक से दो लड़के ऐसे होते हैं जिन्हें खेलने में अधिक दिलचस्पी नहीं होती थी तो हम उन दोनों लड़कों को बड़ी फुटबॉल लाने के लिए भेज देते थे और जैसे ही वे बड़ी फुटबॉल लेकर आते हैं हम छोटी गेंद को बड़ी फुटबॉल से बदल देते थे। 

कई बार ऐसा होता था की हम लोग खेल में इतने ज्यादा मगन होते कि हमें बेल बजने का भी नहीं पता चलता था इसलिए हम बीच-बीच में देखते थे कि कहीं लड़कियां चली तो नहीं गई। और जब हम लड़कियों को लाइन बनाकर वापस जाते देखते तो हमें एहसास हो जाता की बैल बज चुकी है। 

यह तो थी मेरी फुटबॉल से जुड़ी कुछ यादें आइए आपको रूबरू करवाता हूं फुटबॉल खेल से।

mera priya khel football

मेरा प्रिय खेल फुटबॉल पर निबंध 6 टू 12 क्लास 1000 शब्द

फुटबॉल अपने आप में एक महान खेल है और इस खेल की विशेषता यह है कि यह बेहद ही सरल खेल है जिसे कोई भी आसानी से समझ सकता है, और खेल सकता है। फुटबॉल को अंग्रेजी में सौकर कहा जाता है और यह खेल विदेशों में काफी ज्यादा लोकप्रिय है। यदि भारत की की जाए तो वेस्ट बंगाल मैं फुटबॉल सबसे अधिक लोकप्रिय है और वही सबसे अधिक खेला जाता है। 

फुटबॉल एक सामूहिक आउटडोर खेल है जिसे आयताकार घास या कृत्रिम घास के मैदान पर खेला जाता है। फुटबॉल खेल दो टीमों के बीच खेला जाता है तथा प्रत्येक टीम में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। फुटबॉल मैदान में दोनों छोरों पर एक एक गोल पोस्ट होता है यह धातु का बना हुआ होता है। इस गोल पोस्ट में गोलकीपर खड़ा होता है जिसे फुटबॉल को गोल पोस्ट के बाहर ही रोकना होता है और विपक्षी टीम यह कोशिश करती है कि किसी प्रकार से गोलकीपर को चकमा देकर गोलपोस्ट के अंदर फुटबॉल को पैरों द्वारा शॉट मार कर पहुंचा दे। ऐसा करने पर उन्हें अंक रूप में एक गोल मिल जाता है और जो टीम ज्यादा गोल करती है अर्थात विपक्षी गोल पोस्ट के अंदर ज्यादा बार गेंद पहुंचाने में कामयाब होती है वह टीम मैच जीत जाती है। 

पूरे मैच के दौरान मात्र गोलकीपर ही एक ऐसा खिलाड़ी होता है जो गेंद को अपने हाथों से भी रोक सकता है। जबकि खेल में अन्य 10 खिलाड़ियों को फुटबॉल को हाथ लगाने का अधिकार नहीं होता है ऐसा करने पर उन्हें हैंड फाइन लगता है और विपक्षी टीम को फ्री शॉट मिलता है। यदि खिलाड़ी  फुटबॉल को गलती से भी अपने डी के अंदर हाथ लगा देता है तो विपक्षी टीम को पेनल्टी नामक शॉर्ट मिलता है और उनके पास गोल दागने का सुनहरा मौका बन जाता है। जब फुटबॉल हवा में होती है तो उसे रोकने के लिए खिलाड़ियों को हाथ के अलावा अपने शरीर के अन्य पार्ट्स का इस्तेमाल करना होता है जैसे पैर, थाई, छाती, सर आदि। 

जो टीम खेल के अंत समय तक ज्यादा गोल करती है वह विजेता बन जाती है। यदि खेल खत्म होने के बाद भी दोनों टीमों का स्कोर बराबर हो तो उस मैच को ड्रॉ घोषित करना, खेल को एक्स्ट्रा समय देकर आगे बढ़ाना, पेनल्टी शूटआउट द्वारा नतीजा निकालना सब उस प्रतियोगिता के स्वरूप पर निर्भर करता है।

इंग्लैंड को आधुनिक फुटबॉल का जनक माना जाता है। नवी शताब्दी में यूरोप के कई देश फुटबॉल खेला करते थे उस समय इंग्लैंड में लोगों के झुंड फुटबॉल खेला करते थे जिसे माब फुटबॉल कहा जाता था। आधुनिक फुटबॉल को इंग्लैंड में फुटबॉल एसोसिएशन के साथ एकत्रीकरण किया गया  तथा 1863 में बने लॉस ऑफ द गेम के आधार पर ही आज का फुटबॉल खेला जाता है। 

एसोसिएशन फुटबॉल का महासंघ फीफा को कहा जाता है फीफा का फुल फॉर्म है फेडरेशन इंटरनेशनल डी फुटबॉल एसोसिएशन। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल की सबसे प्रतिष्ठित और लोकप्रिय प्रतियोगिता फीफा विश्व कप है। फीफा विश्व कप हर 4 वर्ष के अंतराल में होता है और इसमें दर्शकों की संख्या ग्रीष्मकालीन ओलंपिक के दर्शकों से दोगुनी होती है। फीफा वर्ल्ड कप अपने आप में एक बेहद बड़ी प्रतियोगिता है इसे पूरे विश्व में देखा जाता है।

यदि बात करें फीफा वर्ल्ड कप जीतने की तो 2002 में ब्राजील, 2006 में इटली, 2010 में स्पेन तथा 2014 में जर्मनी ने फीफा वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया है। 

फुटबॉल खेल परिचय

फुट का मतलब पैर होता है और बॉल खेलने वाली वस्तु होती है, जब बोल को पैर से ठोकर मारने के कारण इसका नाम फुटबॉल पड़ा। फुटबॉल एक आउटडोर खेल है जो दो टीमों के बीच खेला जाता है तथा प्रत्येक टीम में 11-11 खिलाड़ी होते हैं। गोलकीपर एक ऐसा खिलाड़ी होता है जिसका कर्तव्य फुटबॉल को रोक कर गोल होने से बचाना होता है। गोलकीपर खिलाड़ी कुछ ही दूरी तक जा सकता है इसे अधिकतर समय गोल के समीप ही बिताना होता है। 

फुटबॉल खेल की अवधि कुल 90 मिनट होती है जिसे 45-45 मिनट के अंतराल में विभाजित किया जाता है। जो भी टीम विपक्षी टीम पर अधिक गोल करती है उस टीम को विजेता माना जाता है।


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