बाउंसर बॉल के नियम के अनुसार गेंदबाज़ एक ओवर में 2 बाउंसर बॉल डाल सकता है। बाउंसर बॉल डालने के लिए आपको मुख्य तौर पर दो बातों का ध्यान रखना होगा पहला कन्धा और दूसरा रिस्ट का इस्तेमाल आपको करना होगा तभी एक सटीक सनसनाती हुई बाउंसर जाएगी। अपने शुरुआती दौर में गेंदबाज़ को इन दोनों स्किल्स को अलग अलग डेवलप करना चाहिए।
नेट्स में या घर पर प्रैक्टिस के दौरान आपको 10-15 गेंद कंधे की ताकत से पटकी हुई बाउंसर डालने की प्रैक्टिस करनी चाहिए और 10-15 गेंद रिस्ट का इस्तेमाल करते हुए बाउंस करनी चाहिए और प्रैक्टिस के आखिर के 15-20 मिन्ट्स में कंधे और रिस्ट दोनों का एक साथ इस्तेमाल करते हुए बाउंसर करने की प्रैक्टिस करनी चाहिए।
फास्ट फारवर्ड – बॉल गृप, रन अप, बॉल रिलीज़ पॉइंट, कन्धा और रिस्ट का इस्तेमाल, कंधे और रिस्ट दोनों का एक साथ इस्तेमाल।
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बाउंसर बॉल कैसे डाला जाता है
बॉल गृप – बॉल को मुख्यतः दो उँगलियों और एक अंगूठे से पकड़ा जाता है जिसमे दो उँगलियाँ अंग्रेजी अल्फाबेट के वी (V) आकार में सिलाई के ऊपर से रखी जाती हैं और अंगूठा नीचे से सपोर्ट के लिए रखा जाता है तथा आखिर की दो उँगलियाँ आधी मुड़ी हुई होती हैं, ध्यान रहे की बॉल आपकी हथेली से दूर रहे।
रन अप – बाउंसर बॉल डालने का सही तरीका एक अच्छे और स्मूथ रन अप से होकर गुज़रता है। सबसे पहले 15 से 16 कदम का रन अप निर्धारित कर लें और इसी रन अप से प्रैक्टिस करें। बाउंसर बॉल डालने के लिए पहले 2 से 3 कदम धीरे दौड़ें फिर 5 वे कदम से धीरे – धीरे दौड़ने की गति को बढ़ाएं और 12 वे कदम तक पहुँचते – पहुँचते गति को फुल स्पीड कर दें तथा आखिरी के 3 से 4 क़दमों में पूरी ताकत झोंक दें यानि 15-16 वे कदम पर पूरी ताकत अपने कंधे में समेट लें और गेंद को रिलीज़ कर दें।
बॉल रिलीज़ पॉइंट – एक गेंदबाज़ का बॉल को छोड़ने का समय ही यह निर्धारित करता है की बॉल बाउंसर गिरेगी लेंथ एरिया पर गिरेगी या यॉर्कर गिरेगी। जिस तरह से यॉर्कर बॉल डालने के लिए गेंद को जल्दी रिलीज़ किया जाता है बिलकुल उसके विपरीत बाउंसर बॉल को सबसे आखिर में रलीज़ किया जाता है। जब गेंदबाज़ का बॉलिंग आर्म उसके सर को 40-45 डिग्री तक क्रॉस कर जाए तो उसे बॉल रिलीज़ कर देनी चाहिए।
बाउंसर बॉल ट्रिक
बाउंसर बॉलिंग की प्रैक्टिस को आपको 3 से 4 सेशन में डिवाइड कर देना चाहिए तथा हर सेशन में 40-50 गेंद डालने की कोशिश करें।
1st सेशन – सबसे पहले सेशन में सिंपल बाउंसर डालें यानि ना ही रिस्ट और ना ही शोल्डर पर ध्यान दें इस सेशन को वार्म अप के तौर पर रखें किन्तु हल्के में ना लें।
2nd सेशन – दूसरे सेशन में एक्यूरेसी पर ध्यान दें यानी रिलीज़ पॉइंट पर इस सेशन में भी शोल्डर और रिस्ट पर ध्यान ना दें केवल रिलीज़ पॉइंट पर ध्यान फोकस करें यानि बॉल कब छोड़नी है इस बात पर ही ध्यान केंद्रित करें।
3rd सेशन – अब तीसरे सेशन में केवल रिस्ट या केवल शोल्डर बाउंसर डालने की प्रैक्टिस करें। तकरीबन 40 से 50 गेंदे डालने का प्रयास करें और इन 40 से 50 गेंदों को भी दो भागों में बाँट लें यानि 25 बार रिस्ट बाउंसर तथा 25 बार शोल्डर बाउंसर डालने का प्रयास करें और आखिरी सेशन में रिस्ट प्लस शोल्डर दोनों को एक साथ इस्तेमाल करते हुए बाउंसर बॉल डालने का प्रयास करें। इस तरह से मात्र एक महीने में आप बाउंसर गेंद डालने में महारत हांसिल कर लेंगे।
बाउंसर बॉल के प्रकार
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख्तर ऐसे विस्फोटक गेंदबाज़ हैं जिन्हें खतरनाक बाउंसर के लिए जाना जाता है और जिन्होंने कई दिग्गज बल्लेबाज़ों को अपनी बाउंसर बॉल पर कभी आउट कर तो कभी इंजर्ड करके पवेलियन भेजा है। शोएब अख्तर के युटुब अनुसार बाउंसर के मुख्य प्रकार ये होते हैं – हेड हाई बाउंसर, स्किड थ्रू बाउंसर तथा फ्लोटिंग बाउंसर
- हेड हाई बाउंसर – इस प्रकार की बाउंसर में कंधे के साथ रिस्ट का अहम् रोल होता है और बॉल को रिलीज़ करते वक्त रिस्ट को नीचे की ओर फ्लिप करना होता है यानि रिस्ट को नीचे को ओर झटकना होता है शोएब के अनुसार उन्होंने महान बल्लेबाज़ ब्रायन लारा को इसी बाउंसर पर ज़ख़्मी करते हुए पवेलियन भेजा था गेंद लारा के गर्दन पर जाकर लगी थी इस प्रकार की बाउंसर अक्सर बल्लेबाज़ के सामने से राइज़ करते हुए सर के ऊपर से निकलती है।
- इस प्रकार की बाउंसर में बॉलिंग आर्म कान के पास से आता है।
- स्किड थ्रू बाउंसर – यह बाउंसर बल्लेबाज़ के सामने से ऊपर की ओर चढ़ती है और अक्सर बल्लेबाज़ के शरीर को निशाना बनाती है इस बाउंसर में हाथ थोड़ा साइड आर्म होता है शोएब ने दादा यानि गांगुली को इस बाउंसर से काफी परेशां किया है और कई दफा उनकी रिब केज में प्रहार भी किया है दादा के आलावा जस्टिन लेंगर और मैथ्यू हैडन भी शोएब की इस बाउंसर के शिकार हुए हैं।
- फ्लोटिंग बाउंसर – इसे तैरता हुआ बाउंसर कहते हैं और इस बाउंसर में हाथ थोड़ा पीछे से साइड आर्म आता है और यह गेंद ऊपर की ओर राइज़ करता है किन्तु बाकी बाउंसर की तुलना में थोड़ा लेट राइज़ करता है।
यॉर्कर बॉल कैसे डाले
यॉर्कर बॉल डालने के लिए गेंदबाज़ को सही समय पर गेंद रिलीज़ करनी होती है वरना गेंद यॉर्कर के बजाए फुल टॉस, लेंथ गेंद या शॉट पिच गिर सकती है। जब गेंबाज़ का बॉलिंग आर्म उसके सर के ऊपर से 12-15 डिग्री आगे निकल जाए तो उसी वक्त गेंदबाज़ को गेंद रिलीज़ करनी होती है।
पूछे गए प्रश्न एवं उत्तर
क्रिकेट में बाउंसर बॉल क्या है?
यह गेंदबाज द्वारा आधे पिच में पटकी हुई गेंद होती है जो उछलती हुई तेज रफ्तार के साथ बल्लेबाज के कंधे और सर की ऊंचाई पर जाती है।
बाउंसर बॉल कैसे डालते हैं?
बाउंसर बोल डालने के लिए गेंदबाज को तेजी से दौड़ते हुए गेंद को आधे पिच में पटकना होता है। गेंद पटकते समय कंधा और कलाई दोनों का एकसाथ इस्तेमाल करने पर एक तेज रफ्तार गेंद निकलती है।
बाउंसर बॉल डालने के लिए गेंद जल्दी रिलीज करें या देर से?
देर से।
बाउंसर बॉल के प्रकार बताइए?
हेड हाई बाउंसर, स्किड थ्रू बाउंसर, फ्लोटिंग बाउंसर।
बाउंसर बॉल के नियम क्या हैं?
बाउंसर बॉल रूल अनुसार 1 ओवर में 2 बाउंसर गेंदे डाली जा सकती है।
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Narendra Patel, thanks for the appreciation.