सौरव गांगुली का जीवन परिचय

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इस आर्टिकल में आप जानेंगे सौरव गांगुली का निजी जीवन और तथ्य। सौरव गांगुली का जीवन परिचय के बारे में बताया गया है जिसके अंतर्गत सौरव गांगुली की जीवनी के मुख्य पहलुओं को छूने की कोशिश की गई है।

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सौरव गांगुली बायोग्राफी

सौरव गांगुली का पूरा नाम सौरव चंडीदास गांगुली है और उनका जन्म 18 जुलाई 1972 को बंगाल में हुआ था। सौरव गांगुली का जन्म चंडीदास और नीरूपा गांगुली के घर हुआ था। सौरव गांगुली बंगाल में ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष में दादा के नाम से जाने जाते हैं, दादा का मतलब होता है ‘बड़े भाई’ और दादा शब्द बंगाल में काफी प्रसिद्ध है। सौरव गांगुली बाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज तथा भारत के सबसे सफलतम कप्तानों में से एक है या यू कह सकते हैं की कप्तानी की सफलता की कहानी सौरव गांगुली ने ही लिखनी शुरू की थी जिसे आगे चलकर महेंद्र सिंह धोनी ने पूरे विश्व में प्रसिद्ध किया। सौरव गांगुली एक बेहतरीन खब्बू बल्लेबाज रहे हैं, सौरव ना सिर्फ लंबे-लंबे छक्के मारने के लिए प्रसिद्ध  हैं बल्कि पूरे विश्व ने उनकी कप्तानी का लोहा भी माना है। यह आर्टिकल आपको पसंद आ रहा है, इसे पढ़ते रहे।

सौरव गांगुली ने अपनी कप्तानी के दौरान कई एक्सपेरिमेंट किए और कई नए लड़कों को अपनी ज़िद से सिलेक्टर के खिलाफ जाकर टीम में शामिल किया उनमें से एक युवराज सिंह का नाम भी आता है।  जिस समय सौरव गांगुली भारत के कप्तान थे उस समय भारत कई बदलावों से गुजर रहा था तथा सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और सौरव गांगुली के अलावा किसी भी खिलाड़ी की सीट फिक्स नहीं थी धीरे-धीरे सौरव गांगुली ने एक ऐसी टीम बना डाली जिसे हराना पूरे विश्व में सम्मान की बात मानी जाने लगी। सौरव गांगुली ने अपनी टीम के खातिर अपनी पोजीशन को छोड़ निचले क्रम में बल्लेबाजी भी की उन्होंने टीम हित के लिए सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग की ओपनिंग कराई और तीसरे से चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने लगे जिसके भारत को परिणाम भी अच्छे मिले। हालांकि सौरव गांगुली अपने कार्यकाल में भारत को कोई भी वर्ल्ड कप नहीं जितवा पाए किंतु हम सब जानते हैं वह कितने बेहतरीन कप्तान रहे हैं। भारत द्वारा दादा की कप्तानी में खेला गया 2003 का वर्ल्ड कप शायद ही कोई भूल सकता है जिसमें भारत ने फाइनल तक का सफर तय किया था किंतु फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के हाथों हारा था। 

सौरव गांगुली का जीवन परिचय

सौरव गांगुली जीवनी – वर्तमान में सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष है, वर्ष 2022 के अनुसार सौरव गांगुली की उम्र 49 वर्ष चल रही है। सौरव गांगुली का जन्म एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था तथा सौरव गांगुली के डैडी की गिनती कोलकाता के चंद रईसों मैं होती थी। सौरव गांगुली के डैडी चंडीदास गांगुली एक सफल छपाई का व्यवसाय चलाते थे। एक संपन्न और अच्छे परिवार में जन्म लेने के कारण सौरव गांगुली को क्रिकेटर बनने के लिए किसी भी प्रकार की आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा बल्कि उनके पास हर प्रकार की सुख सुविधा मौजूद थी। सौरव गांगुली को लोग ना सिर्फ दादा बल्कि महाराजा तथा प्रिंस ऑफ कोलकाता के नाम से भी पुकारते हैं और उसकी वजह उनकी संपन्नता तथा उनके जीने की शैली को माना जाता है।

सौरव गांगुली अपने शाही अंदाज के लिए जाने जाते हैं और इसी अंदाज़ की शुरू में उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी थी। यह बात उस समय की है जब सौरव गांगुली को भारतीय क्रिकेट टीम में 12वे खिलाड़ी के तौर पर शामिल किया गया था और पिच पर खेल रहे खिलाड़ी को पानी देने के लिए उन्हें कहे जाने पर सौरव गांगुली ने साफ इंकार कर दिया था हालांकि उनका यह अंदाज उनके पूरे क्रिकेट करियर के दौरान भी नहीं बदला। सौरव गांगुली ने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर नामक स्कूल से प्राप्त की, सेंट जेवियर बंगाल का जाना माना स्कूल था। बंगाल में फुटबॉल खेल काफी प्रसिद्ध है और क्रिकेट से पहले दादा ने फुटबॉल में अधिक रूचि ली थी तथा नियमित फुटबॉल खेलते थे। हालांकि, बाद में अपने बड़े भाई स्नेहाशीष गांगुली की सलाह पर सौरव गांगुली ने क्रिकेट खेलना शुरू किया तथा अपने खेल से सारी दुनिया को ऐसा मंत्रमुग्ध किया कि अब तक सौरव गांगुली का नाम ऑल टाइम बेस्ट क्रिकेट खिलाड़ियों में गिना जाता है। उम्मीद है यह आर्टिकल आपको पसंद आ रहा है, इसे पढ़ते रहे।

सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर

सौरव गांगुली को क्रिकेट में लाने के लिए उनके बड़े भाई ने काफी मदद की थी और आज सौरव गांगुली दुनिया के महानतम कप्तान तथा एकदिवसीय क्रिकेट के महानतम बल्लेबाजों में शामिल है। सौरव गांगुली ने अपने  क्रिकेट खेल की शुरुआत राज्य और स्कूल की टीम में खेल कर की थी। सचिन तेंदुलकर के बाद भारत के लिए एकदिवसीय मैचों में 10000 रन से ज्यादा बनाने वाले सौरव गांगुली दूसरे खिलाड़ी बने। 2002 मे विजडन क्रिकेटर्स अलमैनक ने उन्हें विव रिचर्ड्स, सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा, डीन जोंस तथा माइकल बेवन के बाद छठे सबसे बड़े वनडे बल्लेबाज का दर्जा दिया था।  भारतीय घरेलू टूर्नामेंट जैसे रणजी ट्रॉफी और दिलीप ट्रॉफी में खेलने के बाद पहली बार सौरव गांगुली को भारतीय क्रिकेट टीम में खेलने का मौका मिला और इंग्लैंड दौरे के लिए उनका सिलेक्शन हुआ। उन्होंने 131 रन बनाए और उसके बाद श्रीलंका, पाकिस्तान तथा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला में बेहतरीन प्रदर्शन कर भारतीय टीम में अपनी जगह पक्की की। 1999 क्रिकेट विश्व कप में सौरव गांगुली ने अपनी बल्लेबाजी का जौहर दिखाया तथा राहुल द्रविड़ के साथ मिलकर 318 रन की साझेदारी की थी, यह विश्वकप के इतिहास में दूसरी सर्वोच्च साझेदारी है। 

सौरव गांगुली के कप्तान बनने की कहानी

स्कूल डेज से ही सौरव गांगुली ने अपनी बल्लेबाजी  का जौहर दिखाना शुरू कर दिया था। उन्होंने बंगाल अंडर 15  क्रिकेट टीम की ओर से खेलते हुए उड़ीसा के खिलाफ शतक जड़ा था।

सौरव गांगुली का चयन कप्तानी के लिए अचानक से हुआ और उनसे पहले हरफनमौला खिलाड़ी अजय जडेजा का नाम कप्तानी की लिस्ट में सबसे ऊपर था। 2000 में मैच फिक्सिंग मामले मे कुछ भारतीय खिलाड़ियों के नाम आने से तथा अपने खराब स्वास्थ्य के चलते कप्तान सचिन तेंदुलकर ने कप्तानी के पद से इस्तीफा दे दिया  था और उनके बाद सौरव गांगुली को भारतीय टीम का कप्तान नियुक्त किया गया। सौरव गांगुली जल्द ही काउंटी की ओर से डरहम के लिए खराब प्रदर्शन तथा 2002 के नैटवेस्ट सीरीज मैं अपनी शर्ट उतारने के लिए मीडिया की आलोचना का शिकार हुए थे। अगर आप इस आर्टिकल को एंजॉय कर रहे हैं इसे अंत  तक पढ़ें।

किंतु 2002 के नैटवेस्ट को दर्शकों का भरपूर सपोर्ट तथा प्यार मिला और सौरव गांगुली के टी शर्ट उतार  कर घुमाने को फैंस का भरपूर सहयोग मिला था तथा उस लम्हे को आज तक भारतीय फैंस नहीं भुला पाए हैं। दरअसल नैटवेस्ट के एक मैच में इंग्लैंड के खतरनाक ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने भारत को हराने के बाद भरे मैदान पर अपनी टी-शर्ट उतारकर हवा में घुमाई थी और मैदान में दौड़ लगाई थी इसी प्रतिक्रिया का जवाब देते हुए क्रिकेट के महाराज यानी प्रिंस ऑफ कोलकाता सौरव गांगुली ने नैटवेस्ट फाइनल में भारत के जीतने पर पवेलियन से ही टी-शर्ट उतार कर हवा में घुमाई थी जिसे दर्शकों का भरपूर प्यार और सम्मान मिला क्योंकि वह फाइनल भारत ने बहुत दिलचस्प अंदाज में जीता था। इस मैच के हीरो युवराज सिंह और मोहम्मद कैफ रहे थे तथा युवराज के आउट होने पर मोहम्मद कैफ इस मैच को आखिर तक लेकर गए और आखिरी ओवर में जहीर खान के साथ मिलकर उन्होंने यह मैच भारत को जिताया था। यह फाइनल मैच वाकई में नाखून चबाने वाला रोमांच से भरा हुआ मैच था।

सौरव गांगुली के बारे में जानकारी

2008 में सौरव गांगुली ने कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए अपने आईपीएल करियर का आगाज किया तथा उसी वर्ष उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के साथ घरेलू टेस्ट श्रृंखला के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अलविदा कह दिया था। दादा ने पश्चिम बंगाल के लिए खेलना जारी रखा तथा उन्हें बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ क्रिकेट डेवलपमेंट कमेटी का अध्यक्ष चुना गया।

सौरव गांगुली एक बेहतरीन एकदिवसीय बल्लेबाज रहे और अब तक भारतीय टेस्ट कप्तानों में से सबसे सफलतम कप्तानों की लिस्ट में उनका नाम आता है। सौरव गांगुली ने 49 टेस्ट मैचों में से 21 टेस्ट मैचों में भारत को जीत दिलाई है। सौरव गांगुली ने विदेशों में 11 टेस्ट मैचों में भारत को जीत दिलाई है जो कि किसी भी भारतीय कप्तान के लिए एक बड़ा आंकड़ा है। सौरव गांगुली ने 311 मैचों में 11363 रन बनाए हैं। सौरव गांगुली द्वारा कप्तानी का कार्यभार संभालने से पहले भारतीय टीम पूरे विश्व में आठवें स्थान पर थी और सौरव गांगुली के रिटायर होने के वक्त भारतीय टीम दूसरे स्थान पर पहुंच गई थी। 

सौरव गांगुली रिकॉर्ड्स

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टेस्ट मैच – 113 मैच – 7212 रंस

एक दिवसीय – 311 मैच – 11363 रंस

आईपीएल मैच – 59 मैच – 1349 रंस

सौरव गांगुली अवॉर्ड्स तथा पुरस्कार 

अर्जुन अवार्ड –  1998

स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ द ईयर – 1998

बंगा विभूषण पुरस्कार – 2013

पद्मश्री पुरस्कार – 2014 

सौरव गांगुली का निजी जीवन

यह बात कम ही लोग जानते हैं कि सौरव गांगुली ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर अपनी गर्लफ्रेंड डोना गांगुली से शादी रचाई थी। हालांकि सौरव गांगुली काफी रईस परिवार से ताल्लुक रखते थे किंतु उन्होंने शादी करते वक्त डोना के व्यवहार को ज्यादा मान्यता दी और मध्यम वर्ग की डोना से शादी रचाई। डोना गांगुली एक ओडीशि नृत्यांगना थी जिन्हें सौरव गांगुली ने पसंद कर लिया और उनके साथ चोरी छुपे अगस्त 1996 मे कोर्ट मैरिज कर ली थी। हालांकि 1997 में दोनों के परिवार राजी हो गए और उन्होंने पूरे पारिवारिक ढंग से सभी रीति-रिवाजों के साथ दोबारा शादी रचाई और 2001 में सौरव गांगुली एक बेटी के पिता बने जिनका नाम उन्होंने सना रखा। 

सौरव गांगुली के बारे में प्रश्न उत्तर

सौरव गांगुली के डैडी का क्या नाम है?

सौरव गांगुली के डैडी का नाम चंडीदास गांगुली है।

सौरव गांगुली की मम्मी का क्या नाम है?

 सौरव गांगुली की मम्मी का नाम नीरूपा गांगुली है।

सौरव गांगुली की पत्नी का क्या नाम है?

सौरव गांगुली की पत्नी का नाम डोना गांगुली है।

सौरव गांगुली की बेटी का क्या नाम है?

सौरव गांगुली की बेटी का नाम सना गांगुली है।

सौरव गांगुली के भाई का नाम क्या है?

 सौरव गांगुली के बड़े भाई का नाम स्नेहाशीष गांगुली है।

सौरव गांगुली के खेलने की शैली क्या है?

सौरव गांगुली बाएं हाथ के ओपनिंग बल्लेबाज रहे हैं तथा दाएं हाथ से मीडियम पेस गेंदबाजी भी करते थे।

सौरव गांगुली का उपनाम बताइए?

सौरव गांगुली कई उप नामों से जाने जाते हैं; दादा, बंगाल टाइगर, प्रिंस ऑफ कोलकाता तथा महाराजा।

सौरव गांगुली ने अपना पहला टेस्ट मैच कब खेला?

सौरव गांगुली ने टेस्ट मैच में पर्दापरण 20 जून 1996 इंग्लैंड, लॉर्ड्स के मैदान पर किया था।

सौरव गांगुली ने अपना अंतिम टेस्ट मैच कब खेला?

सौरव गांगुली ने अपना अंतिम टेस्ट मैच 6 नवंबर नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेला।

सौरव गांगुली ने वनडे मैच मे खेलने की शुरुआत कब की

11 जनवरी 1992 को गाबा वेस्टइंडीज के विरुद्ध सौरव गांगुली ने अपने एकदिवसीय मैच का आगाज किया।

सौरव गांगुली ने अपना अंतिम एकदिवसीय मैच कब खेला?

सौरव गांगुली ने अपना आखिरी वनडे मैच ग्वालियर में 15 नवंबर 2007 पाकिस्तान के विरुद्ध खेला

सौरव गांगुली ने पहला आईपीएल मैच कब खेला?

सौरव गांगुली ने पहला आईपीएल मैच कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से खेलते हुए 18 अप्रैल 2008 को  रॉयल चैलेंज बेंगलुरु के खिलाफ किया।

सौरव गांगुली ने अपना अंतिम आईपीएल मैच कब खेला था

सौरव गांगुली ने अपना अंतिम आईपीएल मैच पुणे में 19 मई 2012 को कोलकाता नाइट राइडर्स के विरुद्ध पुणे वारियर्स की ओर से खेला था।

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