सचिन तेंदुलकर की कहानी | सचिन तेंदुलकर बायोग्राफी

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दोस्तों इस पोस्ट में मैं आपसे सचिन से जुड़े कुछ खास और कुछ अनसुने किस्से शेयर करूँगा, सचिन तेंदुलकर की कहानी, सचिन के प्रैक्टिस के कुछ टिप्स भी आप जानेंगे, सचिन ने अचानक सन्यास क्यों लिया इसके बारे में थोड़ा विचार, सन्यास के बाद वे कहाँ गए थे, किस मैच में तूफ़ान आया था, सचिन की फॅमिली डिटेल्स और अब सचिन क्या कर रहे हैं यह सब हम जानेंगे सचिन तेंदुलकर बायोग्राफी।

सचिन तेंदुलकर की कहानी (सचिन तेंदुलकर बायोग्राफी)

सचिन के पिताजी रमेश तेंदुलकर – सचिन की माताजी का नाम रजनी और पिताजी का नाम रमेश तेंदुलकर है। सचिन का जन्म 24 अप्रैल सन 1973 में हुआ। सचिन के पिता संगीत के शौकीन थे और सचिन0 देव0 बरमन के फैन थे और इसलिए सचिन के पिताजी ने उनका नाम सचिन रखा पर उस समय सचिन के डैडी को पता नहीं था की उनका बेटा खेल की दुनिया में ऐसी धुन बजाएगा जो सदियों तक गूंजती रहेगी।

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सचिन की पारी में बड़े भाई अजीत का योगदान

सचिन के बड़े भाई अजीत तेंदुलकर ने सचिन की कला को सबसे पहले पहचाना और उन्हें प्रोत्साहित किया की वे क्रिकेट को सीरियसली खेले। अजीत ही थे जिन्होंने सचिन को गुरु रमाकांत की शरण में पहुँचाया। सचिन के कोच रमाकांत अचरेकर ने पहले सचिन को कोचिंग देने से मना कर दिया था पर अजीत की कोशिशों से बाद में वे मान गए।

गुरु रमाकांत आचरेकर का योगदान

सचिन को सचिन बनाने में जितना योगदान उनके कोच का है उतना शायद ही किसी का गुरु रमाकांत सचिन को एक ही दिन में कई मैच खिलाते थे । अब आप पूछोगे की वो कैसे तो मै आपको बता दूँ रमाकांत जी सचिन के आउट होते ही उन्हें दूसरे मैच में अपने स्कूटर में बैठा कर ले जाते थे और गलती से सचिन वहां भी आउट हो जाते तो गुरूजी उन्हें तीसरे मैच में ले जाते दरअसल गुरु आचरेकर का काफी नाम था और मुंबई में कई जगहों पर मैच होते थे उनमे से ज़्यादातर में आचरेकर जी का योगदान होता था अतह वे सचिन को आसानी से मौका दे पाते थे।

सचिन की अद्भुत प्रतिभा को कोच ने काफी पहले देख लिया था और वे उसे और निखारना चाहते थे।

सचिन का किस्सा 13 सिक्कों का

सचिन ने अब तक 13 सिक्के जीते हैं, जी हाँ सचिन के कोच प्रैक्टिस या मैच खत्म होने के बाद सभी खिलाडियों को इकठ्ठा कर लेते थे फिर चाहे 15 या 20 खिलाडी ही क्यों न हो। अब कोच रमाकांत विकेट्स के ऊपर 1 सिक्का रख देते थे और बाकि खिलाडियों को कहते की जो सचिन को आउट करेगा सिक्का उसका साथ ही सचिन को कहते की यदि तुम आउट नहीं हुए तो सिक्का तुम्हारा इस तरह सचिन ने कुल 13 सिक्के जीते। कोच का यह फार्मूला वाकय प्रशंसनीय है इससे सचिन को डबल से ज़्यादा कम्पटीशन मिला और वह एक महान खिलाडी सचिन बन सके।

सर डॉन ब्रैड मैन और शेन वार्न ने सचिन के बारे में क्या कहा

सचिन दुनिया के पहले बल्लेबाज़ हैं जिनके नाम 100 अंतराष्ट्रीय शतक हैं उनके दुनिया में सबसे ज़्यादा रन हैं और वह एकदिवसीय मैच में पहली डबल सेंचुरी मारने वाले बल्लेबाज़ हैं। ऑस्ट्रेलिया महान बल्लेबाज़ सर डॉन ब्रैडमैन ने कहा था की वे सचिन में अपनी छवि देखते हैं और ऑस्ट्रेलिया के ही ज़बरदस्त स्पिन गेंदबाज़ शेन वार्न ने शारजहां, कोका कोला सीरीज में सचिन से बुरी तरह मार खाने के बाद कहा था की सचिन अब उनके सपने में भी आकर उनकी गेंदबाज़ी की धजियां उड़ाने लगे है।

सचिन के रिकार्ड्स

रिकार्ड्स – सचिन दुनिया के सबसे पहले 10 हज़ार रन बनाने वाले खिलाडी हैं। सचिन के सबसे ज़्यादा शतक हैं कुल 100 शतक जिसमे से 49 एक दिवसीय शतक और 50 टेस्ट शतक हैं। सचिन ने अपना 100th शतक एशिया कप में बंगलादेश के खिलाफ मीरपुर स्टेडियम में 16 मार्च 2012 में लगाया था। सचिन ने आखरी एक दिवसीय अंतराष्ट्रीय मैच पाकिस्तान के खिलाफ18 मार्च 2012 को खेला था। सचिन ने आखरी टेस्ट मैच 14 नवंबर 2013 वेस्ट इंडीज के खिलाफ खेला था जबकि सचिन ने टेस्ट डेब्यू मैच 15 नवंबर 1989 को खेला तथा एक दिवसीय डेब्यू मैच भी पाकिस्तान के खिलाफ 18 दिसंबर 1989 में खेला था। सचिन दुनिया के पहले खिलाडी हैं जिन्होंने 200 रन एक दिवसीय मैच में बनाया उन्होंने 24 फेब 2010 में ग्वालियर के रूप सिंह स्टेडियम में साउथ अफ्रीका के खिलाफ यह कारनामा किया।

अचीवमेंट – सचिन तेंदुलकर को 4 फरवरी 2014 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी द्वारा राष्ट्रपति भवन, दरबार हॉल में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।

सचिन का परिवार

सचिन फैमिली – सचिन की लव मैरेज हुई है उनकी पत्नी का नाम अंजलि है जो काफी सुलझी हुई और समझदार हैं। अंजलि पेशे से डॉक्टर हैं और वह सचिन से 5 साल बड़ी हैं पर दोनों की जोड़ी काफी अंडरस्टैंडिंग है और काफी लोकप्रिय भी है। सचिन के दो बच्चे हैं एक लड़का और एक लड़की। लड़की बड़ी है और उनका नाम सारा तेंदुलकर है लड़के का नाम अर्जुन है वह पहली बार IPL में मुंबई की तरफ से इसी साल (2021) चुने गए हैं।

सचिन का अचानक सन्यास

सचिन का सन्यास – सचिन ने एक दिवसीय मैचेस से सन्यास अचानक ही लिया था जिसकी कभी किसी ने कल्पना नहीं की थी। सन्यास की घोषणा करते ही सचिन पहाड़ों में दूर अपने मसूरी वाले बंगले में चले गए थे शायद वो भी काफी दुखी थे वहां उनके साथ उनका परिवार और उनका एक डौगी गया था।

सचिन के सन्यास लेने से पहले संदीप पाटिल भारत के नए कोच बने थे सब जानते हैं की सचिन ने अपनी मर्ज़ी से सन्यास नहीं लिया क्योंकि कुछ समय पहले ही उन्होंने अपने पूरे केलिन्डर ईयर की प्रैक्टिस की प्लानिंग कर ली थी फिर नजाने ऐसा क्या हुआ की सचिन ने ऐसा कदम उठाया जिसने उनके सारे प्रशंसकों को मायूस कर दिया था मैं भी उनमे से एक था। यदि आपको याद हो तो उन्होंने आखरी एक दिवसीय मैच 18 मार्च 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था।

आपको याद दिला दूँ की जब सचिन ने सन्यास लिया था उसी समय निर्भया काण्ड भी हुआ था जिसने पूरे देश में मुजरिमों के प्रति नफरत भर दी थी और हर तरफ निर्भया का ज़िक्र था इस तरह सचिन का सन्यास भी कहीं दब गया था।

उन्होंने कुछ समय तक मुंबई के लिए IPL भी खेला और अब वे IPL में मुंबई के मेंटर की भूमिका में हैं।

शारजहां का तूफ़ान और टोनी ग्रेग की कमेंट्री

कोका कोला कप 1998 शरजहाँ – शायद ही यह सीरीज कोई भूल पाया है इस मैच में मुख्य अंपायर स्टीव बकनर और जावेद अख्तर थे तथा कमेंटेटर टोनी ग्रैग, रवि शास्त्री थे टोनी महान कॉमेंटेटर थे उनकी कमेंट्री और सचिन की बल्लेबाज़ी की अलग ही जुगलबंदी होती थी वह जिस अंदाज़ में कमेंट्री करते थे मैंने आज तक ऐसा दोबारा किसी को नहीं देखा उस श्रृंखला में भी ऐसा ही कुछ हुआ वह त्रिकोणीय श्रृंखला थी जिसमे भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यू ज़ीलैंड थे उस सीरीज में भारत हारकर भी नेट रन रेट के आधार पर फाइनल में पहुंचा था सचिन ने लगातार दो शतक लगाए थे। पर यह श्रृंखला फाइनल से पहले वाले मैच के लिए जानी जाती है उस मैच में रेतीला तूफ़ान आया था और उसके बाद सचिन और भी ज़्यादा खतरनाक हो गए थे वह ऐसे सिक्स मार रहे थे की अम्पायर बकनर भी हैरान होते हुए सिक्स दे रहे थे।

सचिन ने 2003 वर्ल्ड कप का गोल्डन बैट ध्वस्त किया

सचिन के कुछ अनसुने किस्से – शायद आपको पता न हो या हो पर यह बात थोड़ी इमोशनल है जब सचिन 2003 का वर्ल्डकप खत्म कर घर पहुंचे तो उनके साथियों ने उनसे गोल्डन बैट जो की सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ को मिलता है दिखाने को कहा तब सचिन ने बताया की उन्होंने वह गोल्डन बैट तो ऑस्ट्रेलिया में ही छोड़ दिया उन्होंने बताया की जब हम फाइनल नहीं जीत पाए तो मेरे लिए उस गोल्डन बैट के कोई मायने नहीं हैं इसे सुन उनके साथी भी भावुक हो गए। दोस्तों आपको बता दूँ 2003 वर्ल्डकप में सचिन ने करिश्माई बल्लेबाज़ी की थी और 3 शतक भी लगाए थे साथ ही कुछ अर्धशतक भी यह वही सीरीज थी जब सचिन ने शोएब को ऑफ स्टंप के बहार करारा छका टांगा था।

सचिन vs हेनरी ओलंगा

सचिन vs हेनरी ओलंगा – साथियों यूँ तो कई किस्से हैं पर सबसे खास किस्सा ज़िम्बाब्वे के हेनरी ओलंगा का है एक मैच में ओलंगा सचिन को आउट कर काफी खुश थे और इंटरव्यू में उन्होंने काफी कुछ कहा भी था पर उन्हें पता नहीं था की वो उनका लास्ट मैन ऑफ़ द मैच इंटरव्यू है क्योंकि अगले मैच में सचिन ने ओलंगा की काफी बुरी तरह से धुनाई की इतनी धुनाई की कि हेनरी ओलंगा ने उस सीरीज के खत्म होते ही सन्यास कि घोषणा कर दी और कमेंटेटर बन गए। यह किस्सा क्रिकेट जगत के सबसे रोचक किस्सों में से एक है। इसके आलावा शेन वार्न ने कहा था कि उनको सपने में भी सचिन दिखते हैं जो वहां भी उनकी बोलिंग कि पिटाई कर रहे होते हैं ।

सचिन के जूते – दोस्तों सचिन ने जितना ज़्यादा क्रिकेट खेला है उतनी चोटे भी खाई हैं आपको बता दूँ की सचिन एक खास प्रकार के जूते पहना करते थे जिसमे उन्हें कम्फर्टेबले लगता था।

सचिन की पसंद – सचिन को लता मंगेशकर के गाने पसंद हैं। क्रिकेट के आलावा सचिन टेबल टेनिस और लॉन टेनिस के तो वे बचपन से ही दीवाने थे आपको बता दूँ सचिन स्कूल डेज में जॉन मैकनरो के बड़े फैन थे और सचिन भी मैकनरो की तरह लम्बे बाल रख कर घूमते व लॉन टेनिस खेलते थे।

सचिन के प्रैक्टिस सीक्रेट्स

  • सचिन ने शेन वार्न से निपटने के लिए मुंबई के लोकल बॉलर से लेग स्टंप पर खुदी हुई ( फावड़े से खोदा गया था ) पिच पर बॉलिंग करने को कहा और जमकर प्रैक्टिस की थी।
  • सचिन फ़ास्ट और बाउंस से निपटने के लिए गीली फर्श पर टेनिस की बोल का कवर उतार कर बैटिंग प्रैक्टिस करते थे।
  • गोल्फ बॉल को थोड़ा सा काट कर टेस्ट मैच के लिए प्रैक्टिस करते थे इससे उन्हें तेज़ स्विंग, तथा मूव करने वाली गेंदों का अच्छा अभ्यास मिला।
  • सचिन घंटो तक शीशे के सामने स्ट्रेट ड्राइव की प्रैक्टिस करते थे वे बल्ला सीधा रखने पर फोकस करते थे।
  • सचिन तेंदुलकर ने फुटवर्क की प्रैक्टिस सीढ़ियों पर भी की है।
  • सचिन मात्र एक स्टंप से भी बैटिंग प्रैक्टिस करते थे।

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